सफर जिंदगी का ..
दरिया है वक़्त का ये बहना है सबको इसमें बेबस बुझा- बुझा सा तनहा मैं बह रहा हूँ ! न बस में पकड़ सकूं उस कारवाँ को मैं उड़ती है जिसकी राह में गर्द -ए-सफर अभी तक ! ना हक है रुक के राह में करूँ उसका इंतजार आएगा मेरे बाद जो तनहा मेरी तरह ! वक़्त-ए-सफर अलग है...
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NirjharNeer
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[03 Mar 2009 01:48 AM]



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