खिलखिला कर कैसे हँसतें हैं भला, अब तो बच्चा ही कोई सिखलाएगा।
आप सबको मेरा नमस्कार................ काफी दिनों के बाद एक ग़ज़ल लगा रहा हूँ, कुछ व्यस्तताओं में घिरा हुआ था मगर अब कोई शिकायत का मौका नही दूंगा। अब के जब सावन घुमड़ कर आएगा। दिल पे बदली याद की बरसाएगा। . मन से अँधियारा मिटेगा जब, तभी अर्थ दीवाली का सच...
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अंकित "सफ़र"
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[03 Mar 2009 01:44 AM]



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