नारी - तुम मेरी माँ हो ,बेटी और पत्नी भी हो -----( वीरेन्द्र की नयी कविता )
प्रिय कौशल, मेरी घुसपैठिया कविता आपको अच्छी क्या लगी कि मैं उन्मादी हो गया. और पुरातात्त्विक हो चुकी डायरी से एक और कविता निकाल लाया. इस उत्साह को अन्यथा न लें. आगे कविता नियमित रूप से न भेज सकूंगा. वीरेन्द्र नारी तुम मेरी मां हो बेटी और पत्नी भी हो....
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Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
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[03 Mar 2009 01:15 AM]



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