चल मेरी सखी

तलाश दो चार दिन पहले यूँ ही चार लाईने दिमाग में घूम रही थी। हम ठहरें आलसी आदमी, सोचा चलो घूमने दो काहे उन्हें परेशान करें। पर जब संडे के दिन बेटी को चिड़ियाघर घुमाकर आए। तो हम थक गए थे सोचा वो चार लाईने भी घूमते घूमते थक गई होंगी इसलिए अब उन्हें आराम दे दे... [पूरी पोस्ट]
writer सुशील कुमार छौक्कर
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[02 Mar 2009 23:54 PM]

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