रोशनी गुनगुनाने लगी

गीतकार की कलम रोशनी गुनगुनाने लगी चाँदनी के मचलते हुए साज पर रोशनी गुनगुनाने लगी रात भर जो कमल पत्र पर था लिखा इक सितारे ने गंधों भरी ओस से भोर वह गीत गाने लगी जुगनुओं की चमक से गले मिल गई गंध महकी हुई एक निशिगंध की बादलों ने पकड़ चाँद की उंगलियाँ याद फिर से दिलाई... [पूरी पोस्ट]
writer Geetkaar
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[02 Mar 2009 21:39 PM]

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