अब तक क्या किया, जीवन क्या जिया!

अ आ सुबह आए कुछ फोनों से पता चला की आज मेरा जन्म-दिन है। लोगों की बधाइयां ली, धन्यवाद किया और लगे हाथों अपने मन को भी खुश कर लिया। सुबह-सुबह मन खुश हो गया तो कुछ गुनगुनाने की इच्छा हुई। पर ऐसे खुशनुमा समय में भी 'जय हो' जैसी कोई उल्लसित पंक्तियाँ नहीं या... [पूरी पोस्ट]
writer Arun Aditya
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[02 Mar 2009 07:57 AM]

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