क्रांति कथा

राही मासूम रज़ा का साहित्य छावनी में पटना की आते थे अक्सर एक मुल्ला उजली दाढ़ी, उजला कुरता और उजला पाएजामा मुद्दत तक गोरे नहीं समझे क्या मक़सद था उनका रखके किताबों में लाए थे शहर से वह संदेसा आजादी के दीवाने को फिक्र नहीं थी तन मन की सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा सुनो सत्तावन की... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
views
20
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[02 Mar 2009 03:07 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix