सामाजिक समरसता की अवधारणा एवं अर्थ
समरसता एक बहुव्यापी आयाम है। मानव, पशु-पक्षी, जड़-चेतन आदि सभी में सामंजस्य हेतु समरसता अपरिहार्य है। मानव के संगठन हेतु यह परम आवश्यक परिस्थिति है। वर्ण, वर्ग, जाति, समूह, समिति, संस्था, धर्म, सम्प्रदाय, सभ्यत, संस्कृति सभी में समरसता होने पर ही समाज...
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समुत्कर्ष
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[28 Feb 2009 13:07 PM]



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