जिन्दगी की इस दौड़ में

आलोक जिन्दगी की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है ? जब यही जीना है दोस्तों तो फिर मरना क्या है ? पहली बारिश में छाते की फ़िक्र है भूल गए वो भीगते हुए टहलना? धारावाहिक के किरदारों का सारा हाल है मालूम पर माँ का हाल पूछने की फुर्सत नहीं है ? अब घास पे नंगे पा... [पूरी पोस्ट]
writer आलोक सिंह
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[28 Feb 2009 10:36 AM]

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