अदब से मौत का भी सामना करे कोई ...
गुरु देव पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से तैयार ये ग़ज़ल आप सभी के सामने है ... आप सभी के प्यार और आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ .... ये मुख़्तसर सी जि़ंदगी है क्या करे कोई । है सांस आखिरी बची दुआ करे कोई ॥ घुटन है जिन्दगी ये फिर भी जी रहा हूं मैं । क्युं...
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"अर्श"
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[28 Feb 2009 10:06 AM]



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