प्रेम पत्र या प्रमाण पत्र

फ़लसफ़े कुछ अरसा हुआ सुनीता (शानूजी ) एक कविता पढ़ी थी प्रमाण पत्र जिस पर मैंने एक टिप्पणी की । उनकी कविता से सधन्यवाद प्रेरित होकर उसी टिप्पणी को विस्तार देकर यह कविता गढ़ी है. पति की बातों पर मत जाना प्रेम पत्र बहकावा है इश्क विश्क की बातें करना मर्दों का छल... [पूरी पोस्ट]
writer Poonam
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[28 Feb 2009 01:05 AM]

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