दस्तक

Jyotsna Pandey जब भी कोई दस्तक होती है मैं दौड़ जाती हूँ कहीं तुम तो नहीं जाने क्यों? तुम्हारा ही इंतज़ार रहता है, इन आँखों को अब तो आदत सी हो गयी मुझको हर वक़्त एक दस्तक सुनायी देती है तुम्हारे आने की आहट खुशबू सी फैलाती मेरे मन मैं सिमट जाती है " तुम मेरे भीतर हो... [पूरी पोस्ट]
writer Jyotsna Pandey
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[27 Feb 2009 10:34 AM]

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