यदि मनुष्य दीवाल है जिसे कोई हटा नहीं सकता तो भाषा एक नींव है जिसे हटाने के प्रयास में दीवाल को ही जाना है ......
कुछ बातें ऐसी होती हैं जो पास होते हुए भी अपनी उपस्थिति नहीं बतला पाती हैं । पर कुछ तो ऐसी होती हैं जो कहीं पर वर्णित या यों कहें की किसी व्यक्तित्व द्वारा कथित अथवा एक विचारणीय अवस्था में उत्पादित होकर भी हमें और हमारी आत्मीयता को अन्दर तक झकझोर डाल...
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anilpandey
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[27 Feb 2009 07:26 AM]



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