कुछ भी खोने का साहस नहीं बचा है मन में

विनय पत्रिका उगना रे मोर कितै गेला परसों घर से किताब लेकर निकला। हालाकि किताब और कलम लेकर निकलना मेरी आदतों में शामिल हो गया है। जब से होश सम्हाला है मुझे याद नहीं कि कभी घर से बिना किताब या कलमे के निकला होऊँ। मुझे याद नहीं कि कभी किसी से कलम माँग कर कुछ लिखा हो... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व

खोना

views
66
upvote
22
downvote
0
rating
22
comments
9
[27 Feb 2009 05:42 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix