असल कविता

कबीरा खडा बाज़ार में ..... वही असल कविता थी रद्दी समझ टोकरी के हवाले कर दिया निर्ममता के साथ सखेद वापस किया वही असल कविता थी अनजाने हल्दी, राई, मिर्च की पुड़िया बँध गई ना जाने कहाँ से कहाँ तक पहुँची असंख्य हाथों की गर्माह्ट से गुज़री किसी पगडंडी से होती सुदूर बीहड़ में गई असल कवि... [पूरी पोस्ट]
writer sareetha
views
32
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
4
[26 Feb 2009 09:38 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix