होली के मजा बा गँउवें में, कहीं चौताल हS तS कहीं जोगीर्रा

भोजपुर नगरिया पिछिला होलिआ में घर से बार-बार फोन आवे की ए बाबू तूँ लोग-लइकन के ले के घरे चली आव अउरी ए बेरी के होली तूँ गउँए मनावS। मलिकाइनियो कहली की घरे फगुआ मनवले ढेर दिन हो गइल बा। हम सोंचनी की हमहुँ दु-तीन बरीस से फगुआ में घरे नइखीं रहल, तS काहें ना ए बेरी के... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[26 Feb 2009 03:53 AM]

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