दो गहरे साये ...
झील के उस पार दो गहरे साये कभी घटते से कभी बढ़ते से मैं अक्सर देखा करता लहरों में उठते तूफानों से बेखबर अपनी हसीन दुनिया में व्यस्त इक दूजे को पूर्ण समर्पित। मैं रोज सुबह उठता अखबार पढ़ता और इसी झील के किनारे आता। उन सायों से मेरा एक रिश्ता बहुत घनिष...
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Dr.Bhawna
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[26 Feb 2009 03:39 AM]



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