बस हमें लग गया सो लग गया....क्या कर लोगे हमारा

kuch ehsaas कल की ही तो बात है!एक परिचित बातों बातों में कह उठे..." कल शाम को आते हैं आपके घर" ठीक साहब,,आ जाइये" अब कल शाम भी आई! हम बाकी सारे प्रोग्राम निरस्त करके बैठे हैं साहब का इंतज़ार करते!शाम गहराने लगी...हम इंतज़ार करते रहे!फोन लगाने की कोशिश की ..मगर वो... [पूरी पोस्ट]
writer pallavi trivedi
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[26 Feb 2009 03:39 AM]

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