विश्व को ललकारने की धृष्टता - मित्र की राय सर आंखों पर
वीरेन्द्र के लेख पर प्रिय संजीव की टिपण्णी -आप ब्लॉग पर आए हम सब अनुगृहित हुए।जैसा की हम सब मित्रों की बरसों पुराणी राय रही है की आप बाचिक परमम्परा के दुरंधर एवं बेजोड़ रहें है.आपके इस अनमोल और दुर्लभ गुण के कारण , ज़माना गवाह है ,आपके मित्र कितना कुछ...
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Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
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[26 Feb 2009 02:47 AM]



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