मेरी आँखों में

anubhav बरस गए हैं मेरी आँखों में हज़ारों सपने महकने लगे हैं टेसू और मन बावला हुआ जाता है सपनों की कलियाँ दिल की हर डाल पर फूट रही है और ये उपवन नन्दन हुआ जाता है समझ नहीं पा रही हूँ ये तुम हो या मौसम जो बरसा है मुझपर फागुन बनकर... [पूरी पोस्ट]
writer शोभा
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[26 Feb 2009 00:55 AM]

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