GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य हर गाँव में हर शहर में एलान हुआ है यह काम कुछ इस तरह भी आसान हुआ है तनख्वाहों के बटने का भी सामान हुआ है दरबार से दिल्ली के यह फरमान हुआ है जीते तो बड़ा नाम भी, दौलत भी मिलेगी काम आए, तो इस राह में जन्नत भी मिलेगी... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[25 Feb 2009 22:29 PM]

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