प्रभाहत
क्या अभी भी बैठे हैं वहाँ सपने देखने वाले चिड़िया की कलगी पर चीड़ों की फुनगी पर देखते हैं आभा के रक्तिम जहाँ दीखते हैं गहरे से काले [सपने देखने वाले] लौटने वाले साए लंबे होते हैं छाया से प्रेत गर्म हवाएं देस के भेस लौटती आशाएं बरसात की बाती उम्मीदें जि...
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जोशिम
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[25 Feb 2009 15:34 PM]



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