प्रभाहत

हरी मिर्च क्या अभी भी बैठे हैं वहाँ सपने देखने वाले चिड़िया की कलगी पर चीड़ों की फुनगी पर देखते हैं आभा के रक्तिम जहाँ दीखते हैं गहरे से काले [सपने देखने वाले] लौटने वाले साए लंबे होते हैं छाया से प्रेत गर्म हवाएं देस के भेस लौटती आशाएं बरसात की बाती उम्मीदें जि... [पूरी पोस्ट]
writer जोशिम
views
23
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
8
[25 Feb 2009 15:34 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix