पल पल मोहब्बत जी रही ..ज़िन्दगी के आईने में .....
इमरोज़ चित्रकार मेरे सामने ईजल पर एक कैनवस पड़ा है कुछ इस तरह लगता है -- कि कैनवस पर लगा लाल रंग का एक टुकडा एक लाल कपड़ा बनकर हिलता है और हर इंसान के अन्दर का पशु एक सींग उठाता है सींग तनता है -- और हर कूचा - गली - बाजार एक रिंग बनता है मेरे पंजाबी र...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[25 Feb 2009 01:09 AM]



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