रात की नीम अंधेरी बाँहें

KISHORE CHOUDHARY क्या स्नेहा नहीं जानती थी कि कितनी दुविधा में ये कदम उसकी ओर बढ़ रहे थे, बीते दिनों कि बेड़ियाँ आसानी से किसे मुक्त होने देती है अगर वह जानती थी तो फ़िर किस मिटटी की बनी थी जो इतना अपनापन दिखाने के बाद भी निरपेक्ष बनी रह जाती हर बार। श्याम वर्ण सुघड़ स्... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary

दिल-ऐ-नाकाम

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[24 Feb 2009 22:59 PM]

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