अपने घर की दीवारों को आईना तेरा बनाया है
एक तेरे भरोसे पर अपनी सांसो को टिकाया है तेरी उम्मीदों की तपिश में हर पल को जलाया है तेरी यादो में आजकल मैं खोया हूँ कुछ ऐसे अपने घर की दीवारों को आईना तेरा बनाया है मैं तुझसे अपना हाल-ऐ-दिल कैसे कह दूँ तुमने मेरी बातो पे कब कोई आंसू बहाया है तुमने त...
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tarun
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[24 Feb 2009 22:33 PM]



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