मुश्किल है
हर बार तेरे दर से खाली लौट आना मुश्किल है तुझसे नज़रे मिलाकर फिर झुकाना मुश्किल है तेरी आँखों में न जाने कितने चाँद मैंने देखे है तेरे बिना अब यूँ तनहा राते बिताना मुश्किल है तुम कहो तो हर एक साँस अपनी छोड़ आऊं मैं तेरी यादो को लेकिन अब भूल पाना मुश्क...
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tarun
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[24 Feb 2009 22:33 PM]



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