क्या वैदिक धर्म में विभिन्न मत हैं?
कुछ विद्वान होते हुए भी अविद्वता की बात करते हैं तो बड़ा अजीब लगता है जैसे उदाहरण के तौर पर मैंने अभी पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की व्याखित की हुई सांख्य योग, योग शास्त्र, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा एवं वेदांत दर्शन पढ़ी। पुस्तकों की भूमिका में और कहीं-...
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सौरभ आत्रेय
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[24 Feb 2009 17:06 PM]



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