कुछ हसीन लम्हे...
बहुत कुछ ऐसे वाकये हम लोगों के साथ बहुत बार घटित हो जाते हैं, जो भुलाए नहीं भूलते। कुछ हंसाते हैं, कुछ रुलाते हैं। ज्यादातर हंसाते ही हैं। हम तीन भाई हैं। बचपन में तीनों ही अव्वल दर्जे के शरारती थे। शायद अब भी हों। हमारे घर में होली-दिवाली पर जब भी क...
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संदीप शर्मा Sandeep sharma
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[24 Feb 2009 15:14 PM]



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