साहित्य अकदेमी की फैलोशिप का मज़ाक
आज़ादी के बाद जो राष्ट्रीय संस्थाएं देश के नेताओं ने स्थापित की थीं वे आज छोटे छोटे स्वार्थो के साधन बन गई हैं। लोग अपनी अपनी आकांक्षाओं को पूरी करने के लिए इस्तेमाल करके अपने को बड़ा सावित करने में लगे हैं। हमारे द...
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गिरिराज किशोर
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[24 Feb 2009 09:13 AM]



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