काँप उठे पहाड़
हवा ने जब-जब भी बजाई सीटी, पेड़ों ने बजाए बिगुल और काँप उठे पहाड़ । जानता है सोमारु कि पेड़ों के तमतमाए चेहरे बता देते हैं मौसम का हाल । यह भी कि गुस्से से टूट पड़ते हैं पेड़, उभर आते हैं अनगिनत घाव पहाड़ों के सीनों पर । सोचता है सोमारु कि सच है- बड़े नहीं...
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sareetha
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[23 Feb 2009 22:17 PM]



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