मीडिया के मारेः नौकरियां फिर आएंगी पर..

अखाड़े का उदास मुगदर रविवार डॉट कॉम पर २३ फरवरी को प्रकाशित लेख) जब अनापशनाप भर्तियों का दौर था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि छंटनी का वक्त कैसा होगा? कोई नहीं सोचता. पर सिर्फ नहीं सोचने से आप उसे टाल नहीं सकते. मीडिया का धंधा ही परजीवी है. अगर बाज़ार अच्छा चलेगा, तभी... [पूरी पोस्ट]
writer आस्तीन का अजगर
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[23 Feb 2009 03:25 AM]

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