सांड, टेपचू और एक उम्‍मीद के बहाने

उनींदरा और जब किसी मनुष्‍य के पास स्‍वप्‍न न रह जाएं, फैंटेसी न रहे और मिथक नष्‍ट हो जाएं तो वह घनघोर व्‍यवहारिक, यर्थाथवादी आदमी के रूप में बचा रह जाता है। स्‍म्रतिहीन, आध्‍यात्‍मवंचित, स्‍वप्‍नशून्‍य, आदर्श विरत, सपाट, चौकोर, दुनियादार, तिकड़मी, घटिया आदमी... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[22 Feb 2009 16:44 PM]

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