कुछ शेर

kavideepakgupta किसी को आइना दिखलांऊ तो दिखलांऊ मैं कैसे मेरा किरदार ही जब मुझपे खुद उंगली उठाता है ग़लत रस्ते की जानिब पाँव मेरे जब भी उठते है तो वालिद की तरह ये वक्त भी आँखें दिखाता है अदायें देखिये उसकी वो छुप - छुप कर मुझे अक्सर हवाओं के हवाले से इशारा कर बुलाता... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[22 Feb 2009 12:27 PM]

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