अनुत्तरित ही
पूछता हूँ तुमसे मैं कृष्ण उकसाया क्यों तुमने पार्थ को तुम तो परात्पर थे टाल सकते थे युद्ध बचा सकते थे पृथ्वी को रक्त में नहाने से ओ मायावी तुम फ़ूट सकते थे दुर्योधन के दिग्भ्रान्त हृदय में वैराग्य का अंकुर बन कर उसकी महत्वाकाँक्षा के दावानल पर छिड़क सक...
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sareetha
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[22 Feb 2009 06:52 AM]



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