मुक्तक
मुझसे कोई दूर है, ना पास है, बस इक टूटी हुई सी आस है. चल पड़ा हूँ अजनबी रास्ते पर न जाने मुझे किसकी तलाश है....
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अखिलेश सोनी
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[22 Feb 2009 06:32 AM]



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