पागल
मेरी यह लघुकथा 'जनसत्ता सबरंग' के 6 मई 2001 के अंक में प्रकाशित हुई थी। मेरी इच्छा है कि ब्लागर भाई इस लघुकथा को पढ़ने के बाद आज के संदर्भ में नए रूप में गढें, ताकि आपके विचार सामने आ सके। सुनील मंथन शर्मा पागल लड़का बी ए करने के बाद कंप्यूटर सीखकर ए...
[पूरी पोस्ट]
सुनील मंथन शर्मा
21
3
0
3
1
[21 Feb 2009 14:12 PM]



Shuffle








