आदत

सलाम ज़िन्दगी सलाम जिंदादिली पुनीत सहलोत की कविता" कोशिश थी हवाओं की हमें पत्तों की तरह उडाने की, साजिश थी ज़माने की हमें हर वक्त आजमाने की, साथ किसी का मिल न सका कभी, पर आदत हमारी थी हर बार जीत जाने की. यकीन था ख़ुद पर, कुछ कर गुजरने की ठानी थी, दीवानगी जो थी मंजिल को पाने की,... [पूरी पोस्ट]
writer Shamikh Faraz
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[21 Feb 2009 07:53 AM]

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