कुछ पल गुजार लूं
रुक गई साँसे निकालने से पहले, कहा एक बार उससे मिललूं चलने से पहले, कुछ पल गुजार लूं उसकी बाहों में, ज़िन्दगी के ढलने से पहले, बहक जाऊं उसके आगोश में, किसी और के साथ संभालने से पहले, पत्थर बना लूं खुद को तो अच्छा है, एहसास जग न जाए यादों के बहल ने से...
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Neeraj
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[20 Feb 2009 18:52 PM]



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