श्री: भतृ्र्हरि नीतिशतक

धर्म यात्रा अज्ञ: सुखमाराध्य: सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञ:। ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्माऽपि तं नरं न रञ्जयति। अर्थात जो अज्ञानी है उसे सरलता से प्रसन्न किया जा सकता है। जो विशेष बुद्धिमान् है उसे और भी आसानी से अनुकूल बनाया जा सकता है।किन्तु जो मनुष्य अल्प ज्ञान से गर... [पूरी पोस्ट]
writer Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[20 Feb 2009 12:33 PM]

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