अहिल्या
अहिल्या की कथा पढ़ - पढ़ कर सोचती रहती थी मैं अक्सर कि कैसे बदल जाती होगी अक जीती जागती औरत पाषाण की शिला में ? कैसा होता होगा वह क्रूर शाप ? जो जमा देता होगा शिराओं में बहते रक्त को । आज अपने अनुभव से जाना , संवेदनहीन , प्रवंचना युक्त अंतरंगता का साक्...
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सीमा रानी
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[20 Feb 2009 10:37 AM]



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