मुक्त पूंजीवाद के परिणाम

SumanSourabh लेखक -हृद्यानारण दीक्षित मुक्त पूंजीवाद के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था गुलाम हो गई है। विश्व बाजारवाद ने राष्ट्र-राज्य के अधिकारों को हड़प लिया है। केंद्र वैश्विक मंदी से नहीं लड़ पाया, लाखों युवकों की रोजी-रोटी छिनी। रोजगार के अवसर घट गए। केंद्र वैश्... [पूरी पोस्ट]
writer sumansourabh
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[20 Feb 2009 04:52 AM]

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