तुम फ़िर भी......
जानवर************** कहा था ना इस तरह सोते हुए छोड़ कर मत जाना मुझे बेशक जगा देना, बता देते मुहब्बत के सफ़र मे साथ मेरे चल नहीं सकते, जुदाई के सफर में साथ मेरे चल नहीं सकते, तुम्हें रास्ता बदलना है मेरी हद से निकलना है, तुम्हें किस बात का डर था, तुम्हें...
[पूरी पोस्ट]
गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
22
1
0
1
0
[20 Feb 2009 03:35 AM]



Shuffle








