तुम वो बहर बनो

लम्हें जिन्दगी के मेरे ज़िन्दगी के सफर में तुम मेरी चाह है हमसफ़र बनो यही ख्वाब है मेरा एक हर नजारा तुम हर नजर बनो | जहाँ हो वफ़ा हर शाम में , जहाँ ज़िन्दगी हर जाम में , जहाँ चाँदनी हर रात हो , उम्मीद की हर सहर बनो | मैं नहीं काबिल तेरे बना , तू फलक मैं गर्दिश... [पूरी पोस्ट]
writer hemjyotsana "Deep"
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[19 Feb 2009 19:09 PM]

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