गाने!

मनीष उवाच! हम आप को ख्वाबों में ला ला के सतायेंगे... हम आप की आंखों से नींदें ही चुरा ले तो... - साहिर लुधियानवी, गीता दत्त-रफी, प्यासा (1957) मैं जब भी ये गाना गुनगुनाता हूँ, इस शायर की शायरी पर ताज्जुब करते नही थकता हूँ!... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
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[19 Feb 2009 10:37 AM]

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