एक और कविता
देखना , तुम्हारे शब्द हिलें नहीं गाड़ देना जमीन में उन्हें गहरा - और रख देना उनके ऊपर पत्थर ताकि हिला न पाएं अपनी पलकें और निकल न पाएं कोंपल बनकर - इस तरह रखना उन्हें कि कोमलता छू भी न सके , और वे उगें तो सीधा ठूंठ की तरह कठोर , नमीरहित हो कर ताकि बन...
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आलोक शंकर
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[19 Feb 2009 05:23 AM]



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