प्रेम से जीत
नफरत ऒ फैलाने वालों यह तुम ठीक से जान लो नहीं सफल हो सकते तुम विष वमता में जान लो मजहब नहीं सिखाता बैर तुम्हे समझ क्यों ना आये हिंसा कर दहशत फैलाना रास तुम्हे कैसे आये मातृ-भूमी पर मर मिटने का जज्बा लिये हम जीते हैं अनाचारियों को खत्म करने का संकल्प...
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Neeraj
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[18 Feb 2009 11:59 AM]



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