नारी मन

Jyotsna Pandey तुम मेरे जैसी हो या मैं तुम्हारे भीतर कैसे जान लेती हो तुम मेरे सुख दुःख मैं मुस्कराती हूँ तो तुम्हें भी हँसता हुआ पाती हूँ मेरी पीड़ा की तड़प तुम्हारी आंखों से क्यों बह निकलती है? दर्पण कहता है---- मैं तुम जैसी बिल्कुल नही मैं थोडी छोटी, काली और मोट... [पूरी पोस्ट]
writer Jyotsna Pandey
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[18 Feb 2009 09:55 AM]

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