फिर आया फागुन

anubhav फिर आया फागुन…. फिर आया फागुन रंगों की बहार तुम भी आजाओ ये दिल की पुकार टेसू के फूलों ने धरती सजाई अबीर, गुलाल ने चाहत जगाई कोयल की कुहू डसे बार- बार तुम भी आ जाओ… …. खिलती नहीं दिल में भावों की कलियाँ सूनी पड़ी मेरे जीवन की गलियाँ तुम बिन ना मौसम मे... [पूरी पोस्ट]
writer शोभा
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[18 Feb 2009 00:28 AM]

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