इतिहास की चोटों का
इतिहास की चोटों का एक दाग लिए फिरते है | सीने के घराने में इक दर्द लिए फिरते है || हम भूल नही सकते महमूद तेरी गजनी | अब तक भी आंखों में वह खून लिए फिरते है || इतिहास की चोटों का इक दाग लिए फिरते है ||| बाबर तेरे प्याले टूटे बता कितने ? पर सरहदी का अफ़...
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कु.राजुल शेखावत
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[17 Feb 2009 10:29 AM]



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