अबोध फ़िज़ा
आज़ादी के इतने बरसों बाद भी... इतनी तरक्की के बाद भी.. इस देश में औरतों पर जुल्मों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अबला, भोली , निरीह और बेकुसूर नारी फिज़ा के अस्तित्व को तार-तार कर देने वाली घटना में सोमवार को एक और दर्दनाक मोड़ आ गया जब पता चला...
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विवेक वशिष्ठ
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[16 Feb 2009 15:23 PM]



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